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उत्तराखण्ड देहरादून

दान-चढ़ावा चोरी केस में बड़ा खुलासा! 32 दिन की CCTV फुटेज लापता

बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावे में कथित चोरी के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई नए सवाल भी सामने आ रहे हैं। मामले की जांच कर रही एसआईटी अब सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर के रिकवर होने का इंतजार कर रही है। डीवीआर को जांच के लिए देहरादून स्थित फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी यानी एफएसएल भेजा गया है।

सबसे बड़ा सवाल सीसीटीवी फुटेज को लेकर है। बदरी-केदार मंदिर समिति यानी बीकेटीसी ने एसआईटी को 13 दिन की फुटेज उपलब्ध कराई है, जबकि 32 दिन की फुटेज गायब बताई जा रही है। बीकेटीसी की ओर से पहले 45 दिन की फुटेज सुरक्षित होने का दावा किया गया था, लेकिन बाद में तकनीकी कारणों से फुटेज गायब होने की बात सामने आई।

 

अब जांच समिति ने भी अपनी जांच तेज कर दी है। गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति ने प्रभारी मंदिर अधिकारी और वीआईपी प्रोटोकॉल से जुड़े तीन कार्मिकों के बयान दर्ज किए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, वीआईपी प्रोटोकॉल से जुड़े तीनों कार्मिकों ने प्रोटोकॉल में हुई कथित अनियमितताओं के लिए मुख्य आरोपित वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल को जिम्मेदार ठहराया है।

बताया गया है कि वीआईपी और वीवीआईपी प्रोटोकॉल तय करने में नौटियाल के हस्ताक्षर की भूमिका रहती थी और शुल्क वसूली भी उसके निर्देश पर किए जाने की बात सामने आई है।

 

अब जांच समिति ने बीकेटीसी के दो लेखाकर्मियों और तोसाखना से जुड़े कार्मिकों को भी पूछताछ के लिए देहरादून तलब किया है।

तोसाखना में पूजा सामग्री, प्रसाद, चंदन, दान के वस्त्र, केसर समेत अन्य सामग्री जमा रहती है। दान में प्राप्त वस्त्रों को बाद में श्रद्धालुओं को न्यूनतम दर पर प्रसाद के रूप में दिए जाने की व्यवस्था है।

 

उधर, एसआईटी मुख्य आरोपित प्रमोद नौटियाल के बैंक खातों के साथ-साथ जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाल रही है।

पुलिस के मुताबिक, रिमांड के दौरान नौटियाल ने एसआईटी के सामने दान-चढ़ावे से चोरी की बात स्वीकार की थी। हालांकि, मामले में अन्य कार्मिकों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।

एसपी चमोली सुरजीत सिंह पंवार के मुताबिक, जांच जारी है और जल्द ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

 

एसआईटी ने इस वर्ष के दान-चढ़ावे के रिकॉर्ड का खजाने से मिलान कर लिया है। अब पिछले वर्षों के दस्तावेजों को भी खंगाला जा रहा है।

फिलहाल जांच की सबसे अहम कड़ी डीवीआर को माना जा रहा है। एफएसएल से डीवीआर रिकवर होने के बाद यह साफ होने की उम्मीद है कि गायब बताई जा रही 32 दिन की CCTV फुटेज में आखिर क्या रिकॉर्ड था और क्या उससे चढ़ावा चोरी के मामले में कोई अहम सुराग सामने आता है।

यानी बदरीनाथ धाम के चढ़ावे से लेकर CCTV फुटेज, बैंक खातों, जमीन के सौदों और तोसाखना के रिकॉर्ड तक—जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब निगाहें हैं कि डीवीआर और जांच रिपोर्ट से कौन-कौन से राज सामने आते हैं।

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