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उत्तराखण्ड

मनवीर चौहान ने कहा कांग्रेस से भाजपा गधे घोड़े आये  

देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के भीतर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेताओं को लेकर प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान की टिप्पणी ने पार्टी के अंदर ही असहज स्थिति पैदा कर दी है। कांग्रेस से आए नेताओं पर की गई टिप्पणी का विरोध शुरू हो गया है। कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने भी मनवीर चौहान को जिम्मेदार पद की मर्यादा का ध्यान रखने और सोच-समझकर बयान देने की नसीहत दी है।
मनवीर चौहान ने कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि कांग्रेस में रहते हुए जो नेता गधे-घोड़े थे, वे भाजपा में आने के बाद बेहतर विचारधारा वाले बन गए। उनके इस बयान को पार्टी में शामिल हुए नेताओं पर कटाक्ष के तौर पर देखा जा रहा है। बयान सामने आने के बाद भाजपा के भीतर नाराजगी के स्वर उठने लगे हैं। कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को कोई भी बयान देने से पहले सोच-विचार करना चाहिए। नेताओं को विवादित टिप्पणियों से बचना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी के इस आंतरिक मामले का संज्ञान प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री लेंगे। उनके बयान से साफ है कि विवाद को लेकर पार्टी नेतृत्व की भूमिका अहम हो सकती है। भाजपा के भीतर उठे विवाद को कांग्रेस ने भी मुद्दा बना लिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा में शामिल हुए नेताओं से ही पूछा जाना चाहिए कि वे किस श्रेणी में आते हैं। कांग्रेस ने इस बयान के बहाने भाजपा की राजनीतिक कार्यशैली और दूसरे दलों से आए नेताओं के प्रति उसके रवैये पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने भी मनवीर चौहान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा खुद मनवीर चौहान को गंभीरता से नहीं लेती। हरक ने कांग्रेस से भाजपा में गए वरिष्ठ नेताओं पर इस तरह की टिप्पणी को अनुचित बताते हुए कहा कि यदि भाजपा मनवीर के बयान को गंभीरता से लेती, तो कांग्रेस से आए नेताओं को टिकट नहीं देती। उन्होंने यह भी कहा कि मनवीर चौहान तीन बार से टिकट मांग रहे हैं, लेकिन पार्टी उन्हें गंभीरता से नहीं लेती। उत्तराखंड भाजपा में कांग्रेस से आए नेताओं की भूमिका लंबे समय से राजनीतिक चर्चा का विषय रही है। वर्ष 2016 में कांग्रेस में हुई बगावत के बाद पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, सतपाल महाराज, रेखा आर्य, सुबोध उनियाल और प्रदीप बत्रा समेत कई नेताओं ने भाजपा का दामन थामा था। इसके बाद भी कांग्रेस के कई नेता भाजपा में शामिल हुए। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले आया यह बयान भाजपा के भीतर पुराने और नए नेताओं के बीच राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज कर सकता है। अब निगाहें प्रदेश नेतृत्व के रुख पर हैं कि वह इस विवाद को किस तरह संभालता है।

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