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बर्फबारी के बीच हेमकुंड साहिब के कपाट शीतकाल के लिए बंद, 4 हजार श्रद्धालु बने ऐतिहासिक पल के साक्षी

गोपेश्वर। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित सिखों के पवित्र तीर्थ श्री हेमकुंड साहिब और लोकपाल तीर्थ के कपाट शनिवार, 10 अक्टूबर को दोपहर दो बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने के ऐतिहासिक अवसर पर चार हजार से अधिक श्रद्धालु मौजूद रहे। बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। खास बात यह रही कि पाकिस्तान के पेशावर से पहुंचे 40 श्रद्धालुओं के जत्थे ने भी इस धार्मिक समारोह में भाग लिया।
बर्फ की चादर में लिपटा धाम, फिर भी नहीं डिगी आस्था
हेमकुंड साहिब में लगातार हो रही बर्फबारी के चलते करीब एक फीट मोटी बर्फ जम गई थी। अटलाकोटी से हेमकुंड साहिब तक लगभग तीन किलोमीटर लंबा पैदल मार्ग भी बर्फ से ढका हुआ था। प्रतिकूल मौसम और कठिन रास्ते के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु अंतिम अरदास और कपाट बंद होने के समारोह के साक्षी बनने पहुंचे।
मौसम खराब होने के कारण शुक्रवार को केवल 340 श्रद्धालुओं को ही हेमकुंड साहिब जाने की अनुमति दी गई थी। अन्य यात्रियों को सुरक्षा के मद्देनजर घांघरिया में रुकना पड़ा। यात्रा मार्ग से बर्फ हटाने के लिए संबंधित टीमों ने लगातार कार्य किया।
सुबह से गूंजे गुरबाणी और शबद-कीर्तन
कपाट बंद होने की धार्मिक प्रक्रिया सुबह से ही शुरू हो गई थी। श्रद्धालुओं ने सुखमणी साहिब के पाठ और शबद-कीर्तन में भाग लेकर गुरु महाराज के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। दोपहर 12:30 बजे यात्रा सत्र की अंतिम अरदास की गई।
इसके बाद पंच प्यारों की अगुवाई में गुरु ग्रंथ साहिब को सेना के बैंड की मधुर धुनों के बीच सचखंड साहिब में सुशोभित किया गया। निर्धारित धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के बाद दोपहर दो बजे धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस दौरान पूरा परिसर श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में सराबोर रहा।
इस वर्ष 3.80 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
हेमकुंड साहिब के कपाट इस वर्ष 23 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। यात्रा सत्र के दौरान देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे। कपाट बंद होने तक करीब 3.80 लाख श्रद्धालुओं ने मत्था टेककर गुरु महाराज का आशीर्वाद लिया।
पिछले वर्ष की तुलना में इस बार श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, ऊंचाई और मौसम की चुनौतियों के बावजूद श्रद्धालुओं का लगातार पहुंचना हेमकुंड साहिब के प्रति अटूट आस्था को दर्शाता है।
पाकिस्तान के पेशावर से पहुंचा 40 श्रद्धालुओं का जत्था
कपाट बंद होने के समारोह में पाकिस्तान के पेशावर से आए 40 श्रद्धालुओं के जत्थे ने भी भाग लिया। जत्थे का नेतृत्व पपिंद्र सिंह ने किया। अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से परे धार्मिक आस्था और आपसी जुड़ाव का संदेश देने वाला यह क्षण समारोह का विशेष आकर्षण रहा।
कपाट बंद होने के साथ ही इस वर्ष की हेमकुंड साहिब यात्रा का समापन हो गया। अब शीतकाल के दौरान धाम बर्फ से ढका रहेगा और श्रद्धालुओं को अगले यात्रा सत्र में कपाट खुलने का इंतजार रहेगा।
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