पर्वत संकल्प
उत्तराखण्ड

दून विश्वविद्यालय और मेक्सिको के सिनवेस्टाव के बीच एमओयू

देहरादून। उत्तराखंड की उच्च शिक्षा और शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा देने की पहल के तहत दून विश्वविद्यालय और मेक्सिको के प्रतिष्ठित सेंटर फॉर रिसर्च एंड एडवांस्ड स्टडीज (सिनवेस्टाव) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। शनिवार को लोक भवन देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में दोनों संस्थानों ने अकादमिक, वैज्ञानिक और शोध सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमति जताई।
सिनवेस्टाव की स्थापना वर्ष 1961 में हुई थी और यह प्राकृतिक विज्ञान, इंजीनियरिंग तथा मानविकी के क्षेत्र में उन्नत शोध के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान रखता है। यह मेक्सिको का स्वायत्त और केंद्र सरकार से वित्त पोषित सार्वजनिक शोध संस्थान है, जो देश में 11 परिसरों के नेटवर्क के माध्यम से संचालित होता है।
एमओयू का उद्देश्य भारत और मेक्सिको के बीच उच्च शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित, मानविकी और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना है। इसके तहत दोनों संस्थानों के बीच संयुक्त शोध गतिविधियों और परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। समझौते के तहत फैकल्टी और शोधकर्ताओं का आदान-प्रदान, विद्यार्थियों की आवाजाही, संयुक्त सेमिनार, कॉन्फ्रेंस और कार्यशालाओं का आयोजन भी प्रस्तावित है। इसके अलावा दोनों संस्थान संयुक्त अकादमिक कार्यक्रम विकसित करने तथा भविष्य में संयुक्त डिग्री प्रोग्राम की संभावनाएं तलाशेंगे। कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने कहा कि शिक्षा निरंतर सीखने और ज्ञान के विस्तार का क्षेत्र है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग से संस्थानों को एक-दूसरे के अनुभव और ज्ञान से सीखने के नए अवसर मिलते हैं। दून विश्वविद्यालय और सिनवेस्टाव के बीच हुआ यह समझौता शोध के विभिन्न क्षेत्रों को एक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
राज्यपाल ने कहा कि इस साझेदारी से शोध की गुणवत्ता में सुधार के साथ नए पेटेंट विकसित करने और उनके व्यावसायीकरण की दिशा में भी अवसर बढ़ेंगे। साथ ही भारत और मेक्सिको की सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान परंपराओं को समझने का अवसर मिलेगा। उन्होंने इसे केवल अकादमिक समझौता न बताते हुए दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बताया। राज्यपाल ने सिनवेस्टाव के डायरेक्टर जनरल प्रो. अल्बर्टो सांचेज हर्नांडेज और मेक्सिको स्थित भारतीय मिशन की डिप्टी चीफ ऑफ मिशन श्रीमती दीप्ति गांजी के सहयोग और समन्वय की सराहना की। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सहयोग से उत्तराखंड के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल सकती है। उन्होंने राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों से भी अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ इस प्रकार की साझेदारी बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि उत्तराखंड की उच्च शिक्षा और शोध को वैश्विक स्तर पर आगे ले जाया जा सके।
दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने बताया कि दोनों संस्थानों के बीच सहयोग के संभावित क्षेत्रों में कंप्यूटर साइंस, फिजिक्स, मैथमेटिक्स, इकोनॉमिक्स, कल्चर, डिजाइन, बायोलॉजिकल साइंसेज, एनवायरनमेंटल साइंसेज, साइकोलॉजी तथा अर्बन डेवलपमेंट मैनेजमेंट शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि एमओयू के माध्यम से संयुक्त शोध परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के साथ विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन एवं शोध का अनुभव प्राप्त करने के अवसर मिलेंगे।
कार्यक्रम में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की मैक्सिको में डिप्टी चीफ ऑफ मिशन श्रीमती दीप्ति गांजी, सिनवेस्टाव के डायरेक्टर जनरल प्रो. अल्बर्टो सांचेज हर्नांडेज और इंटरनेशनल रिलेशंस कोऑर्डिनेटर प्रो. मार्था एस्पिनोसा वर्चुअल माध्यम से जुड़े। दून विश्वविद्यालय के रिसर्च एंड डेवलपमेंट डायरेक्टर डॉ. अरुण कुमार समेत विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, फैकल्टी सदस्य और शोधकर्ता उपस्थित रहे।

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