उत्तराखण्ड

शिक्षा के नाम पर धर्मांतरण का खेल उजागर, बाल आयोग की छापेमार कार्रवाई

देहरादून, 2 जून। उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र स्थित खैरी गांव में संचालित एक संदिग्ध संस्थान पर छापेमार कार्रवाई कर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और अभिलेख बरामद किए हैं। आयोग का दावा है कि “मेडिकल एम्बेसडर” नाम से संचालित संस्थान में शिक्षा और सामाजिक सेवा की आड़ में धर्मांतरण संबंधी गतिविधियों के संकेत मिले हैं।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना के निर्देश पर हुई कार्रवाई में टीम को पोस्टर, रजिस्टर, प्रचार सामग्री और अन्य दस्तावेज मिले, जिनसे प्रथम दृष्टया संस्थान की गतिविधियां केवल शैक्षणिक कार्यों तक सीमित नहीं प्रतीत हुईं। जांच के दौरान संस्थान में शैक्षणिक गतिविधियों का स्पष्ट स्वरूप भी नहीं मिला।
आयोग के अनुसार दिव्यांग बच्चों और उनके परिवारों की सहायता के नाम पर विभिन्न स्रोतों से आर्थिक सहायता जुटाने तथा लोगों को लाभ और सुविधाओं का प्रलोभन देकर धार्मिक विश्वासों को प्रभावित करने के संकेत भी प्राप्त हुए हैं। कुछ दस्तावेजों से कैनाल रोड स्थित एक अस्पताल से संभावित संबंध भी सामने आया है, जिसकी जांच की जाएगी।
डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि बच्चों की शिक्षा, आर्थिक स्थिति या दिव्यांगता का उपयोग किसी भी छिपे हुए उद्देश्य के लिए किया जाना गंभीर विषय है। उन्होंने बताया कि निरीक्षण में मिले सभी दस्तावेज और सामग्री आगे की जांच एवं वैधानिक कार्रवाई के लिए पुलिस प्रशासन को सौंप दी गई है।
आयोग ने आशंका जताई है कि यह नेटवर्क अन्य राज्यों तक भी फैला हो सकता है तथा विदेशी फंडिंग के संकेतों की भी जांच आवश्यक है। यदि जांच में किसी प्रकार की अवैध गतिविधि, धर्मांतरण या बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई के दौरान आयोग के सचिव एस.के. बर्नवाल भी मौजूद रहे।

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