देहरादून

रात के अंधेरे में धड़ल्ले से चलता है यमराज : नदी का सीना चीर रहे खनन माफिया, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

विकासनगर। विकासनगर क्षेत्र में अवैध खनन का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। सिंघनीवाला पुल के नीचे इन दिनों रात के अंधेरे में खनन माफिया बेखौफ होकर नदी का सीना चीर रहे हैं। देर रात तक चलने वाली टमटम मशीनें, नदी क्षेत्र में गूंजती आवाजें और ओवरलोड डंपरों की आवाजाही अब स्थानीय लोगों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन चुकी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर प्रतिबंध के बावजूद यह पूरा खेल किसके संरक्षण में चल रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जैसे ही शाम ढलती है, नदी क्षेत्र में मशीनें सक्रिय हो जाती हैं। रातभर खनिज सामग्री निकाली जाती है और उसे भारी-भरकम डंपरों में भरकर सड़कों पर दौड़ाया जाता है। आरोप है कि इन वाहनों में निर्धारित क्षमता से कई गुना अधिक सामग्री भरी जाती है। बिना किसी वैध कांटे और सरकारी मापदंड के हो रहा यह काम सीधे तौर पर नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है।
खनन नियमों के मुताबिक सूर्यास्त के बाद किसी भी तरह का खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन सिंघनीवाला क्षेत्र में नियम सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं। देर रात तक मशीनों का संचालन और डंपरों की लगातार आवाजाही प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय नदी क्षेत्र में खुलेआम मशीनें चलती हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है। लोगों का आरोप है कि यदि प्रशासन सख्ती से कार्रवाई करे तो अवैध खनन पर तुरंत रोक लग सकती है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की निष्क्रियता के कारण खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
अवैध खनन से भी बड़ा खतरा उन ओवरलोड वाहनों से पैदा हो रहा है, जो रात के समय तेज रफ्तार में सड़कों पर दौड़ते हैं। भारी मात्रा में खनिज सामग्री भरकर निकलने वाले ये डंपर सड़क पर चलने वाले आम लोगों की जान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार इन वाहनों के कारण दुर्घटना जैसे हालात बन चुके हैं। रात के समय तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग के कारण वाहन अनियंत्रित हो सकते हैं, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद परिवहन और खनन विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही।
अवैध खनन का यह खेल सिर्फ पर्यावरण और लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है, बल्कि इससे सरकार को भी भारी राजस्व नुकसान हो रहा है। बिना रॉयल्टी और बिना वैध मापतौल के निकाली जा रही खनिज सामग्री सीधे तौर पर सरकारी राजस्व को प्रभावित कर रही है। जानकारों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो तो करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का मामला सामने आ सकता है। अवैध तरीके से निकाली जा रही सामग्री का कोई सही रिकॉर्ड नहीं होने के कारण सरकार को मिलने वाला राजस्व खनन माफियाओं की जेब में जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नदी क्षेत्र में इस तरह लगातार मशीनों से खनन किए जाने से पर्यावरण संतुलन भी बिगड़ रहा है। नदी की प्राकृतिक धारा प्रभावित हो रही है और अत्यधिक खनन के कारण बरसात के समय कटाव और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। स्थानीय लोगों को डर है कि यदि समय रहते अवैध खनन पर रोक नहीं लगी तो आने वाले समय में इसका गंभीर असर आसपास के गांवों और पुलों की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन रिसीव नहीं किया गया। अधिकारियों की चुप्पी ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में कार्रवाई करना चाहे तो रात में ही छापेमारी कर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सकता है।
अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर प्रशासन अवैध खनन माफियाओं पर कब शिकंजा कसेगा और सड़क पर मौत बनकर दौड़ रहे ओवरलोड डंपरों पर कब कार्रवाई होगी।

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