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नई दिल्ली)रिंग में हुई बेईमानी और 11 साल का दर्द.. बिस्तर पर जिंदगी से जंग हार गया ये दिग्गज बॉक्सर, 33 की उम्र में तोड़ा दम

नई दिल्ली ,14 अगस्त ,। खेल की दुनिया से एक बेहद ही रुला देने वाली खबर सामने आई है। जिस मुक्केबाज के खूंखार पंच से रिंग में अच्छे-अच्छे विरोधी कांप उठते थे, वह पिछले 11 सालों से एक बिस्तर पर खामोश पड़ा था। साल 2015 में बॉक्सिंग रिंग में हुई एक भयानक और विवादित घटना ने पुएर्टो रिको के स्टार बॉक्सर प्रिचार्ड कोलन की पूरी जिंदगी तबाह कर दी थी। मौत को चकमा देकर सालों तक अपनी सांसों के लिए लड़ने वाले इस 33 वर्षीय पूर्व मुक्केबाज ने अब दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है। उनके निधन की खबर से बॉक्सिंग जगत में मातम छा गया है।
पिता का छलका दर्द, अधूरी रह गई आखिरी ख्वाहिश
प्रिचार्ड कोलन के पिता रिचर्ड कोलन ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक पोस्ट के जरिए अपने बेटे के निधन की दुखद जानकारी दुनिया के साथ साझा की है। उन्होंने भारी मन से बताया कि वे अपने बेटे की आखिरी ख्वाहिश पूरी करने की जी-तोड़ कोशिश कर रहे थे, लेकिन दुर्भाग्य से वे ऐसा नहीं कर सके। इस भयानक दुख की घड़ी में पिता ने उन तमाम फैंस का दिल से शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने इतने सालों तक परिवार को बेशुमार प्यार और दुआएं दीं। कोलन की मां और उनके पूरे परिवार ने पिछले 11 सालों तक साये की तरह उनकी दिन-रात देखभाल की थी।
2015 की वो मनहूस रात और रिंग में हुई खौफनाक घटना
प्रिचार्ड कोलन का बॉक्सिंग करियर किसी सुनहरे सपने जैसा था और वे तेजी से सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहे थे। अक्टूबर 2015 में टेरेल विलियम्स के खिलाफ रिंग में उतरने से पहले वे पूरी तरह से अजेय थे। उन्होंने लगातार 16 मुकाबले जीते थे, जिनमें से 13 बार तो विरोधियों को नॉकआउट कर दिया था। लेकिन टेरेल विलियम्स के खिलाफ खेला गया वह मैच उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा काल बन गया। मैच के दौरान विलियम्स ने नियमों को ताक पर रखकर कोलन के सिर के पिछले हिस्से पर कई खतरनाक पंच मारे। कोलन ने रेफरी से इसकी गुहार भी लगाई, लेकिन रेफरी ने अनसुना कर दिया और मैच जारी रहा। नौवें राउंड में कोलन दर्द से कराहते हुए नीचे गिर पड़े। इस बीच उनके कॉर्नर स्टाफ ने गलतफहमी में उनके दस्ताने उतार दिए, जिसके चलते उन्हें तकनीकी रूप से डिस्क्वालिफाई कर दिया गया।
ड्रेसिंग रूम में बिगड़ी तबीयत और 221 दिन का कोमा
रिंग में हुए उस जानलेवा हमले का असली असर ड्रेसिंग रूम में पहुंचने के बाद दिखा। वहां लौटते ही कोलन की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी, उन्हें उल्टियां हुईं और वे बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच में पता चला कि उनके दिमाग में भयंकर ब्लीडिंग हो रही है। दिमाग की सूजन और दबाव कम करने के लिए डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी की, लेकिन इसके बाद कोलन 221 दिनों तक कोमा में चले गए। कोमा से बाहर आने के बाद भी मस्तिष्क को हुए भारी नुकसान के कारण वे कभी सामान्य जीवन में नहीं लौट सके और ‘वेजिटेटिव स्टेटÓ में पहुंच गए। उनकी आवाज चली गई थी और वे बात करने के लिए कंप्यूटर का सहारा लेते थे। वर्ल्ड बॉक्सिंग ऑर्गनाइजेशन (ङ्खक्चह्र) ने इस महान योद्धा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा है कि प्रिचार्ड कोलन की हिम्मत और जुझारू भावना रिंग की सीमाओं से परे थी और उनका संघर्ष हमेशा याद रखा जाएगा।

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