पर्वत संकल्प
उत्तराखण्ड

23वें तीर्थकर चिंतामणि भगवान पार्श्वनाथ की आराधना की

 

देहरादून। संस्कार प्रणेता ज्ञानयोगी जीवन आशा हॉस्पिटल प्रेरणा स्तोत्र उत्तराखंड के राजकीय अतिथि आचार्य 108 सौरभ सागर जी महामुनिराज के मंगल सानिध्य में प्रातः 6.15 बजे से जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक कर शांतिधारा की गयी। इसके पश्चात संगीतमय कल्याण मंदिर विधान का आयोजन किया गया। विधान में उपस्थित भक्तों ने बड़े भक्ति भाव के साथ 23वें तीर्थकर चिंतामणि भगवान पार्श्वनाथ की आराधना की। आज के विधान के पुण्यार्जक आशीष जैन, अनुपम जैन एवं प्रवीण जैन, चारु जैन रहे। पूज्य आचार्य श्री के पास बाहर से पधारे गुरुभक्तां का पुष्प वर्षायोग समिति द्वारा स्वागत अभिनन्दन किया गया। भगवान पार्श्वनाथ की भक्ति आराधना के दिन पूज्य आचार्य श्री ने कहा कि जब दुनिया के सारे सहारे वेसहारा हो जाते है तब परमात्मा ही एक हमारा सहारा होता है। बच के जाओगे कहा अगर कहीं जा सकते हो तो दुर्गति में। क्योकि अगर सदगति में जाओगे तो वहा भगवान मिलेंगे दुर्गति में तो मिलने वाले है नहीं। नरक ऐसी चीज है जहां भगवान नहीं है। तिर्यच गति में भी मनमुताबिक भगवान मिलते नहीं है। मनुष्य ऐसा विवेकशील प्राणी है जो अपने लिए चाहे जैसे भी घर बना लें। परन्तु परमात्मा के दर्शन के लिए एक ना एक मन्दिर अवश्य बनाता है। क्योकि आप कहीं भी चले जाओगे लेकिन वापस आना तो परमात्मा के पास ही पड़ेगा।

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