देहरादून, 11 फरवरी 2026 – उत्तराखंड वन विभाग ने राज्य में बढ़ती वनाग्नि की चुनौतियों से निपटने के लिए पहली बार अंतर्विभागीय समन्वय बैठक का आयोजन किया। यह बैठक आईसीएफआरई, देहरादून में हुई, जिसकी अध्यक्षता प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (PCCF एवं HoFF) श्री एस.पी. सुबुद्धि ने की। बैठक में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य, अग्निशमन, आपदा प्रबंधन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), वन सर्वेक्षण भारत (FSI), आईसीएफआरई, एफआरआई, यूकोस्ट, उरेडा, रेड क्रॉस सोसाइटी और शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच समन्वित कार्यप्रणाली स्थापित करना और वनाग्नि नियंत्रण, शमन एवं प्रबंधन के लिए ठोस रणनीति तैयार करना था। मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि) ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया, जिसमें राज्य में वनाग्नि की वर्तमान स्थिति, संवेदनशील क्षेत्रों का जोखिम मानचित्रण और पिछले वर्षों के अनुभव साझा किए गए। उन्होंने प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, वास्तविक समय निगरानी, सामुदायिक सहभागिता और त्वरित प्रतिक्रिया दलों के महत्व पर विशेष जोर दिया।
बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मौसम विभाग के सहयोग से चेतावनी प्रणाली को सुदृढ़ करने, उपग्रह आधारित फायर अलर्ट सिस्टम से निगरानी बढ़ाने, संयुक्त नियंत्रण कक्ष और संचार नेटवर्क स्थापित करने तथा आपात स्थिति में NDRF और SDRF की तैनाती सुनिश्चित करने पर सहमति बनी। स्वास्थ्य विभाग और रेड क्रॉस द्वारा आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने, शिक्षा विभाग के माध्यम से विद्यालय स्तर पर जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाने और वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से अनुसंधान एवं तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई।
वनाग्नि रोकथाम के लिए अग्नि रेखाओं का रख-रखाव, नियंत्रित दहन, ज्वलनशील पदार्थों की सफाई और ग्राम स्तर पर वनाग्नि सुरक्षा समितियों की सक्रिय भागीदारी को प्राथमिकता दी गई। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) ने जिला और विकासखंड स्तर पर पूर्व तैयारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक के अंत में पीसीसीएफ ने कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध वन संपदा और जैव विविधता राज्य की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयास, आधुनिक तकनीक और जनसहभागिता से राज्य को वनाग्नि की घटनाओं से सुरक्षित रखा जा सकेगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वनाग्नि की रोकथाम से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी।
सभी विभागों ने वन विभाग को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया और यह निर्णय लिया कि वनाग्नि सत्र से पूर्व एवं उसके दौरान नियमित समन्वय बैठकें आयोजित की जाएंगी।
